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मध्यप्रदेश में श्रमिकों और नियोजक के अनुकूल श्रम कानूनों में बदलाव

 

भोपाल : गुरूवार, अक्टूबर 12, 2017, 18:48 IST
 

प्रदेश में ईज ऑफ डूईंग बिजनेस के उद्देश्य से श्रम कानूनों में प्रक्रियाओं को श्रमिक एवं नियोजक के हित में सरल बनाया गया है। प्रावधानों को अधिक युक्‍तियुक्‍त किया गया है। विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता के साथ सूचना प्रौद्योगिकी का व्‍यापक उपयोग करते हुए वर्ष 2014 से अब तक अनेक महत्वपूर्ण कदम इस संबंध में उठाये गये हैं।

वॉलन्‍टरी कम्‍प्‍लायंस स्‍कीम

अक्‍टूबर 2014 में प्रारंभ की गयी वॉलन्‍टरी कम्‍प्‍लायंस स्‍कीम विश्‍व बैंक, केन्‍द्र सरकार और अन्‍य राज्‍यों द्वारा सराही गयी है। स्कीम में 16 श्रम कानूनों में 61 रजिस्‍टर के स्‍थान पर एक रजिस्‍टर रखने तथा कार्यालयों में 13 रिटर्न की जगह मात्र 2 वार्षिक रिटर्न का प्रावधान किया गया है। पाँच वर्षों में संस्‍थान के अधिकतम एक बार निरीक्षण का प्रावधान किया गया है।

श्रम कानूनों में संशोधन

राज्‍य के 3 और केन्‍द्र के 15 श्रम कानूनों में संशोधन कर निवेशक एवं श्रमिक हितैषी बनाया गया है। राज्‍य के लाखों श्रमिकों के हित में सेवानिवृत्‍ति की आयु 58 से बढाकर 60 वर्ष की गयी। मध्यप्रदेश औद्योगिक नियोजन (स्थायी आज्ञा) अधिनियम के लागू होने संबंधी श्रमिक संख्‍या सीमा 20 से बढ़ाकर 50 की गयी तथा माइक्रो इण्‍डस्‍ट्रीज को इससे छूट दी गयी है। दस से कम श्रमिक संख्‍या वाले संस्‍थानों में निरीक्षण के लिए श्रम आयुक्‍त की अनुमति अनिवार्य की गयी है।

मध्‍यप्रदेश श्रम कल्‍याण निधि अधिनियम से माइक्रो इण्‍डस्‍ट्रीज को छूट दी गयी है। श्रमिकों के अधिसमय कार्य के घंटों को किसी तिमाही में श्रमिकों की सहमति से 75 से बढ़ाकर 125 किये जाने का प्रावधान किया गया है। रात्रि पाली में महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए रात्रि 8.00 बजे से सुबह 6.00 बजे तक कार्य की अनुमति का प्रावधान किया गया है। श्रमिकों को पिछले वर्ष में 240 दिन के स्थान पर 180 दिन कार्य करने पर उसी केलेण्डर वर्ष में सवैतनिक अवकाश की सुविधा उपलब्‍ध करायी गयी है। श्रमिकों की छंटनी की स्थिति में एक माह की सूचना के प्रावधान के स्थान पर तीन माह की सूचना के साथ न्यूनतम 3 माह के वेतन के भुगतान का प्रावधान किया गया है। किसी संस्थान में ले-ऑफ, छंटनी या बंदीकरण के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता 100 श्रमिक वाले संस्थानों के स्थान पर 300 या अधिक श्रमिक वाले संस्थानों के लिए की गयी है। सेवा समाप्‍ति संबंधी औद्योगिक विवाद प्रस्‍तुत करने की समय-सीमा तीन वर्ष निर्धारित की गयी है।

निवेशकों के हित में मध्‍यप्रदेश दुकान एवं स्‍थापना अधिनियम, ठेका श्रम अधिनियम, मोटर यातायात श्रमिक अधिनियम, भवन संन्निर्माण कर्मकार अधिनियम और अन्‍तर्राज्‍यीय प्रवासी कर्मकार अधिनियम प्रावधान किये गये हैं कि यदि अधिनियम में पंजीयन या लायसेंस व उसके नवीनीकरण आवेदन को 30 दिन में स्‍वीकृत नहीं किया जाता है तो इसे स्‍वत: पंजीकृत (डीम्‍ड) माना जाएगा। मध्‍यप्रदेश दुकान एवं स्‍थापना अधिनियम, मध्‍यप्रदेश औद्योगिक नियोजन (स्‍थाई आदेश) अधिनियम, समान पारिश्रमिक अधिनियम, श्रम विधि (विवरणी देने और रजिस्टर रखने से कतिपय स्थापनाओं को छूट) अधिनियम, न्यूनतम वेतन अधिनियम, वेतन भुगतान अधिनियम, विक्रय संर्वधन कर्मचारी (सेवा की शर्ते) अधिनियम में उल्‍लंघन के प्रकरण न्‍यायालय ले जाने के स्‍थान पर कार्यालय में समझौता शुल्‍क देकर निराकृत किये जाने का प्रावधान किया गया।

महेश दुबे